आपको बता दें की भारत में डिजिटल क्रांति लाने वाला ‘पहला सुपर कंप्यूटर’ परम 8000 था। तो चलिए आपको बताते हैं कब और कैसे भारत ने अपना पहला सुपर कंप्यूटर तैयार किया

क्या आप जानते हैं की सुपर कंप्यूटर एक विशेष कंप्यूटर होता है, जो बहुत बड़ी गणनाएं बहुत ही स्पीड से कर सकता है.इसके अलावा न सिर्फ सुपर कंप्यूटर फ़ास्ट प्रोसेसिंग कर सकते हैं बल्कि उनकी मेमोरी क्षमता भी बहुत ज्यादा होती है।

कहते हैं कि डिजिटल भारत का सपना लिए प्रधानमंत्री राजीव गाँधी अमेरिका से सुपर कंप्यूटर लेने गए, लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने सुपर कंप्यूटर देने से इंकार कर दिया और राजीव गाँधी को खाली हाथ वापस लौटना पड़ा।

जब अमेरिका ने सुपर कंप्यूटर देने से इंकार कर दिया, तो भारत ने 1988 में प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने स्वदेशी सुपर कंप्यूटर बनाने का निर्णय लिया जिसके लिए उन्होंने सेंटर फॉर एडवांस्ड कंप्यूटिंग (C-DAC) की स्थापना पुणे में की गयी।

इसके निदेशक के रूप में इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के डॉ विजय भाटकर को नियुक्त किया गया।

C-DAC को सुपर कंप्यूटर डेवलप करने के लिए तीन साल का समय और 30 करोड़ रूपए की फंडिंग दी गयी।

1990 में हुए ज़्यूरिख सुपर कंप्यूटर शो में ये कंप्युटर एक बेंच मार्क बनकर सामने आया. दुनिया के करीब सभी सुपर कंप्यूटर को पीछे छोड़ और अमेरिका के बाद दूसरे नंबर पर सबसे अच्छा सुपर कंप्यूटर का खिताब हासिल किया।

जुलाई 1991 में सामने आया भारत का पहला सुपर कंप्यूटर परम 8000, जिसका नाम “परम” संस्कृत शब्द लिया गया है जिसका मतलब होता है सबसे ऊपर यानि सुप्रीम।

परम 8000 में 64 CPU थे और इसमें Inmos T800 Transputers, जो एक नए तरह का माइक्रोप्रोसेसर आर्किटेक्चर था और जिसका उपयोग इसमें किया गया था. यह मल्टीटास्किंग कर सकता था. उस समय परम 8000 उस दौर के सुपर कम्प्यूटर्स से आगे था।

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भारत के अन्य सुपर कंप्यूटर

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