आइये जानते हैं गोल्ड मैडल के अंदर की सच्चाई क्या है। 

जेवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा ने 7 अगस्त को ओलिंपिक गेम्स के 121 साल के इतिहास में भारत के लिए पहला एथलेटिक्स गोल्ड मेडल जीता है. फाइनल में 87.58 मीटर के बेस्ट थ्रो के साथ उन्होंने गोल्ड मेडल अपने नाम किया।

आपको बता दें गोल्ड मेडल 556 ग्राम का होता है जो pure  gold से नहीं बल्कि सिल्वर का बना हुआ होता है

इस मेडल में सिर्फ 6 ग्राम सोना होता है।इसकी मोटाई 7.7 मिमी से 12.1 मिमी होती है. जबकि इसका ब्यास 58 मिमी होता है। 

इसमें करीब 92 फीसदी शुद्ध चांदी होती है, जिस पर सोने की सिर्फ पॉलिश होती है।

1912 के स्टॉकहोम गेम्स में ही आखिरी बार प्योर गोल्ड के मेडल्स दिए गए थे. उसके बाद इंटरनेशनल ओलिंपिक कमेटी (IOC) के तय नियमों के आधार पर मेडल्स बन रहे हैं।

स्वर्ण पदक की बात करें तो उसमें असली सोना केवल 6 ग्राम (24 कैरेट) होता है, बाकी 92.5 ग्राम चांदी और उसके अलावा तांबा होता है।

इस मेडल की कीमत लगाई जाए तो वो सिर्फ 24,467 रुपये का होगा।

अगर ये पदक खरे सोने के होते तो इनकी कीमत $76,000 होती यानि भारतीय मुद्रा में 50,80,596 रुपये होती।

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