सिंडरेला  की कहानी | cinderella ki kahani story hindi- Updated November 2019

सिंडरेला की कहानी | cinderella ki kahani story hindi- Updated November 2019

सिंडरेला की कहानी (Cinderella Ki Kahani) आप सभी ने अपने अपने बचपन में ज़रूर सुनी होगी। सिंड्रेला की कहानियां सभी के नाना नानी दादू, दादी , पापा मम्मी, सभी कई सालों से सुनते आये हैं।  हर माता पिता अपने बच्चों को मनोरंजन के लिए यह कहानी ज़रूर सुनाता है। सिंड्रेला की कहानी (Story of Cinderella in Hindi) आपको परियों (Fairy) की प्यारी सी दुनियाँ में ले जाती है और हम सपनों में कहीं खो जाते हैं। कैसे सिंड्रेला की ज़िन्दगी एक परी और राजकुमार (Prince) बदल देते हैं आइए एक बार फिर से देखते हैं – Cinderella story in hindi

सिन्ड्रेला की कहानी- Disney's Lovely Story of Cinderella in Hindi

आइये देखते हैं सिंडरेला की कहानी (Cinderella Ki Kahani) के प्रमुख पात्र (Cinderella story in hindi)-

  • सिंडरेला
  • राजकुमार
  • सिंडरेला के पिता
  • सिंडरेला की दोनों बहन
  • परी

बच्चों बहुत पुरानी बात है. एक देश में एक व्यापारी निवास करता था। उसकी  बेटी  – ‘एला’ अत्यंत ही सुंदर और प्यारी थी।  दुःख की बात थी के एला की माँ नहीं थी. वह बचपन में ही गुजर चुकी थी । एला अपनी माँ को याद कर रोज़ रोया करती थी । उसके के पिता जी काम के सिलसिले में ज़्यादातर बहार की यात्रा किया करते रहते थे । उन्हें एला के देखभाल की चिंता थी इसलिए उसकी माँ की कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने एक दूसरी  औरत से फिरसे शादी कर ली । मगर उस महिला की पहले से ही दो बेटियां थी. शादी के बाद एला अपनी नई माँ और बहनों से बहुत प्यार करने लगी । मगर उसकी सौतेली माँ और बहनें बहुत ही दुष्ट थी ।(Cinderella story in hindi)

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भाग २ - सिन्ड्रेला की कहानी- Story of Cinderella in Hindi

वे हर समय एला को जानकर परेशान करने के कोशिश करती थी। एक बार एला के पिता व्यापार के सिलसिले में बाहर गए।  वे शायद किसी दुर्घटना का शिकार हो गए और उनकी मौत हो गयी 🙁

उनकी मृत्र्यु के बाद बेचारी एला एकदम ही अकेली सी हो गयी।  अब क्या था – उसकी सौतेली माँ तो घर की मालकिन बन चुकी थी । वो और उसकी दोनों बेटियाँ एला को और भी परेशान करने लगे। घर का पूरा काम बेचारी एला करती और  वे सभी खुद दिन भर आराम करती रहती। बचपन से राजकुमारियों के तरह रहने वाली एला को अब उनके फटे पुराने कपड़े एवं  जूते इत्यादि पहनने पड़ते। एला मनो अपने ही घर में वह नौकरानी बन गई।

पूरा दिन काम करने के बाद जब एला शाम तक थक जाती थी । तो बेचारी अंगीठी के पास ही सो जाती थी । अगले दिन सुबह जब वह उठती थी , तो बेचारी के  ऊपर अंगीठी की राख (सिंडर) पड़ी हुई होती थी। बस यही वजह थी के उसकी दोनों बहनें उसे सिंडर-एला के नाम से चिढ़ाती थी।  और फिर कुछ ही समय में उसका नाम ‘सिन्ड्रेला’ ही पड़ गया. सिन्ड्रेला अपने जो खली समय मिलता उसमें दो चूहों और एक नन्ही चिड़िया के साथ खेलती थी । वही उसके सच्चे दोस्त थे. (Cinderella story in hindi)

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भाग 3 - सिन्ड्रेला की कहानी- Story of Cinderella in Hindi

फिर एक दिन अचानक राज्य में यह एलान किया गया कि राजमहल में एक बहुत बड़े जलसे का आयोजन किया जा रहा है। जलसे में राज्य की सभी लड़कियों को बुलाया गया. राज महल में आने आने वाली लड़कियों में राजकुमार अपनी राजकुमारी चुनने वाला था।

यह अनोखा एलान सुनने के बाद राज्य की सभी लडकियाँ राजकुमार से शादी का ख्वाब देखने लगी। इधर सिन्ड्रेला की दोनों बहनें भी राजकुमार से शादी करने को बहुत उत्साहित थी। मगर सिन्ड्रेला भी राजमहल और वहाँ का जलसा देखना चाहती थी। परन्तु  सौतेली माँ नहीं चाहती थी कि सिन्ड्रेला वहाँ जाये क्योंकि सिन्ड्रेला बहुत सुंदर लगती थी । और उसकी दोनों बेटियाँ सुंदर कपड़ों में भी उसका मुकाबला नहीं कर पाती थी .

माँ को  डर था कि कहीं राजकुमार सिन्ड्रेला को ही पसंद न कर ले।  इसलिए उसने सिन्ड्रेला को जाने की इज़ाज़त नहीं दी और बहुत सा काम देकर घर पर ही रुकने को बोला।  सिन्ड्रेला उदास थी। उसकी दोनों बहनें सजने सवारने लगी, नए कपड़ों में तैयार होकर जलसे में चली गई.

(Cinderella story in hindi)

भाग 4 - सिन्ड्रेला की कहानी- Story of Cinderella in Hindi, Cinderella ki Kahani

थोड़ी देर बाद घर का काम ख़त्म करने के बाद सिन्ड्रेला अंगीठी के पास बैठ गई । उसके दोस्त चूहे और नन्ही चिड़िया उसके पास ही खेल रहे थे।  वह बहुत उदास थी  उन्होंने उसे हँसाने की बहुत कोशिश की लेकिन सिन्ड्रेला बेचारी हंस न सकी। फिर कुछ ऐसा  जिसका किसी ने भी न सोचा था।  तेज रोशनी चमकी और आँखे चौंधिया गई। कुछ समय में रौशनी कम होने बाद सिन्ड्रेला ने देखा कि एक “परी” उसके सामने खड़ी है। सिन्ड्रेला परी को देखकर मानो सन्न रह गई। परी सिंड्रेला ने प्यार से उसकी उदासी का कारण पूछा और सिन्ड्रेला ने अपने मन की बात पारी को  बता दी।

उसकी बात सुनने के बाद परी पूछती है – “एला! क्या तुम वहाँ  जाना चाहती हो?”

सिंड्रेला कहती हैं  – “हाँ – चाहती हूँ, पर जा नहीं सकती.”

“क्यों?” परी ने पूछा।

“वह इसलिए की अगर  मैं इन फटे कपड़ों में वहाँ गई, तो दरबान मुझे अंदर नहीं घुसने देंगे और मुझे भगा देंगे ”

(Cinderella story in hindi)

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सिंड्रेला की बग्गी, सिंड्रेला की कहानी हिंदी में
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भाग 5 - सिन्ड्रेला की कहानी- Cinderella ki Kahani-

इस पर परी ने मुस्कुराते हुए अपनी जादुई छड़ी घुमाई और एक ही पल में सिन्ड्रेला बहुत ही सुंदर पोशाक पहने बहुत ही सुंदर लग रही थी। फिर परी ने सिन्ड्रेला से एक कद्दू मंगवाया और जादुई छड़ी से कद्दू को एक खूबसूरत बग्गी में बदल दिया।

फिर सिन्ड्रेला के चूहे घोड़े बन गए और  चिड़िया कोचवान। सिन्ड्रेला अब जाने के लिए तैयार थी। परी ने उसे पैरों में पहनने के लिए काँच की अत्यंत ही सुंदर जूतियाँ दी।  चेहरे तथा आँखों के लिए एक नकाब, जिससे कोई उसे पहचान न सके।

ख़ुशी ख़ुशी सिन्ड्रेला बग्गी पर बैठ गई लेकिन परी ने उसे चेतावनी दी कि उसे हर हाल में रात १२ बजे के पहले वापस लौटना होगा । क्योंकि १२ बजे  के बाद उसका जादू खत्म हो जायेगा।  उसके बाद सब कुछ पहले जैसा हो जायेगा जैसे वह फिर से फटे-पुराने कपड़ों में आ जायेगी और उसकी बग्गी वापिस कद्दू बन जायेगा।

भाग 6 - सिन्ड्रेला की कहानी- Cinderella ki Kahani-

अब सिन्ड्रेला रात १२ बजे के पहले वापस आने का वादा करते हुए करते हुए चल पड़ी। वह इतनी खूबसूरत लग रही थी के वह जैसे ही जलसे में पहुँची तो सबकी नज़र उस पर ठहर गई। माँ और बहनें भी उसे देखकर आश्चर्यचकित थीं परन्तु नक़ाब के कारण वे उसे पहचान नहीं पाई। जैसे ही राजकुमार ने उसे देखा, तो उससे प्यार हो गया और वह उसके पास गया और अपने साथ नृत्य करने के लिए आग्रह किया।

राजकुमार ख़ुशी ख़ुशी सिंड्रेला के साथ पूरी शाम नृत्य करता रहा और दोनों बहनें और वहां उपस्थित अन्य लड़कियाँ उससे जलती रही।  राजकुमार ने कई बार उससे उसका नाम जानना चाहा  लेकिन सिन्ड्रेला ने उसे नहीं बताया।  सिन्ड्रेला जलसे में आकर इतनी खुश कि वह परी की कही हुई बात भूल गई।

जैसे ही घड़ी ने रात में १२ बजे का घंटा बजाया उसे परी की बात याद आई और वह महल के बाहर भागी। राजकुमार उससे प्यार करने लगा था और उसके पीछे दौड़ा।  राजकुमार उसे विवाह का प्रस्ताव देना चाहता था लेकिन सिन्ड्रेला रुकी नहीं। भागते भागते जल्दी में उसके एक पांव की जूती महल के दरवाज़े पर ही छूट गई।

भाग 7 - सिन्ड्रेला की कहानी- Cinderella ki Kahani-

राजकुमार ने उसे देखते ही उठा लिया।

जादू ख़तम हो चुका था और घर पहुँचते ही  सिन्ड्रेला अपनी पुराने कपड़ों में वापस आ गई।

पारी के कहे अनुसार बग्गी फिर से कद्दू बन गया और दोस्त चूहे और नन्ही चिड़िया भी वापस अपने रूप में। सिन्ड्रेला ने परी को बहुत धन्यवाद दिया और परी उसे खूब प्यार और आशीर्वाद देकर चली गई।

राजमहल में  राजकुमार सिन्ड्रेला को बहुत याद करने लगा और उसे ढूंढ़ने का फैसला किया। उसने पूरे राज्य में एलान करवाया कि जिस लड़की के पैर में वह जूती आ जायेगी राजकुमार उससे शादी करेगा।

सभी लड़कियां शादी करना चाहती थी।  सब उस कांच की जूती को अपना बताने लगी और सभी ने उन्हें पहनने की बहुत कोशिश की। किसी के भी पैर में नहीं आई.

कुछ दिन बाद राजकुमार अपने सिपाहियों के साथ सिन्ड्रेला के घर पहुँचा और उसे वहा देखकर सिन्ड्रेला की सौतेली बहनें बहुत खुश हुई। वे चाहती थी कि राजकुमार उनसे विवाह कर ले।

जूतियों को दोनों ने हर तरह से  पहनने की कोशिश की, के किसी तरह उनके पैरों में आ जाये।  वे इस कोशिश में सफल न हो सकी। (Cinderella story in hindi)

भाग 8 - सिन्ड्रेला की कहानी- Cinderella ki Kahani-

अचानक ही राजकुमार की नज़र दरवाज़े से छुपकर झांकती हुई सिन्ड्रेला पर पड़ी। राजकुमार नई उसे जूती पहनने के लिए बुलाया और जैसे ही सिन्ड्रेला ने जूती पहनी, तो वह उसके पैरों में एकदम आ गई।

यह सब कुमार देखकर उसकी माँ और बहनें हैरान रह गई। सिन्ड्रेला खुश थी उसने दूसरी जूती भी अपने पास से निकालकर पहन ली।

राजकुमार यह सब देख बहुत खुश हुआ और समझ गया कि सिन्ड्रेला ही वहीँ लड़की है जिससे उसे प्यार हुआ था ।

राजकुमार आगे बढ सिन्ड्रेला के सामने विवाह का प्रस्ताव रखता है जिसे सिन्ड्रेला ने ख़ुशी-ख़ुशी स्वीकार करलेती है।

दोनों ने विवाह कर लिया और एक-दूसरे के रहने लगे. सिंड्रेला के राजकुमारी वाले दिन वापिस आगये। उसे अब कभी वो घर का काम नहीं करना पड़ता था और वे हर जुल्म से आजाद थी ।

इसप्रकार यह कहानी यहीं ख़तम होती है। (Cinderella story in hindi)

शिक्षा - सिन्ड्रेला की कहानी- Moral of Story of Cinderella -

हमें कभी किसी का बुरा नहीं करना चाहिए।

जो आपके भाग्य में है वह आपको ज़रूर मिलेगा।

अंत भला तो सब भला।

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